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Social Media And Teej Celebration- सोशल मीडिया और तीज: ऑनलाइन हो रही पूजा, कैसे वर्चुअल होता जा रहा है त्योहार

Social Media And Teej Celebration- सोशल मीडिया और तीज: ऑनलाइन हो रही पूजा, कैसे वर्चुअल होता जा रहा है त्योहार

Social Media And Teej Celebration

Social Media and Teej Celebration- भारत एक ऐसा देश है जहाँ त्योहारों को बहुत उत्साह और भक्ति के साथ मनाया जाता है। ये केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामुदायिक एकजुटता का प्रतीक भी हैं।

इन त्योहारों में से एक है तीज, जो विशेष रूप से महिलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण पर्व है। यह त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के मिलन का प्रतीक है, और इसमें महिलाएं अपनी पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए व्रत रखती हैं।

Social Media and Teej Celebration- ऑनलाइन वर्चुअल सेलिब्रेशन को दी जा रही है अहमियत, डिजिटल हुआ त्योहार

पारंपरिक रूप से तीज का त्योहार गीत, नृत्य, मेहंदी, और सामूहिक समारोहों के साथ मनाया जाता रहा है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षों में, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने तीज जैसे पारंपरिक त्योहारों को मनाने के तरीके में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला दिया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब, और व्हाट्सएप ने तीज को एक नया आयाम दिया है, जहाँ पारंपरिक और डिजिटल दुनिया का मेल हो रहा है।

Social media and teej

ऑनलाइन पूजा और वर्चुअल उत्सव

पहले तीज के दौरान, महिलाएं अपने घरों में या मंदिरों में सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करती थीं। लेकिन अब, सोशल मीडिया के माध्यम से, ऑनलाइन पूजा और वर्चुअल उत्सव एक नई प्रवृत्ति बन गए हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान, जब लोग एक-दूसरे से शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए मजबूर थे, तब ऑनलाइन पूजा ने एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यूट्यूब और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर मंदिरों और पुजारियों ने लाइव पूजा का प्रसारण शुरू किया, जिससे भक्त घर बैठे ही पूजा में शामिल हो सके। इससे न केवल धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे, बल्कि दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी इन समारोहों में भाग लेने का अवसर मिला।

इसी तरह, वर्चुअल उत्सवों ने भी पारंपरिक समारोहों की जगह ले ली। व्हाट्सएप ग्रुपों पर महिलाएं एक-दूसरे को तीज की शुभकामनाएं भेजती हैं, वर्चुअल रूप से मेहंदी डिज़ाइन साझा करती हैं, और ऑनलाइन गेम और प्रतियोगिताएं आयोजित करती हैं।

गूगल मीट या ज़ूम जैसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करके, महिलाएं अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ एक साथ नृत्य और गायन सत्र आयोजित करती हैं, जिससे वे शारीरिक दूरी के बावजूद एक-दूसरे से जुड़े रह सकें।

ट्रेंड्स, रील्स और साझा की गई खुशी

सोशल मीडिया पर तीज के त्योहार का जश्न एक बड़ा ट्रेंड बन गया है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर हैशटैग #Teej, #HariyaliTeej, और #TeejVibes का उपयोग करके लोग अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं।

इन पोस्ट में महिलाएं अपनी पारंपरिक पोशाकों, गहनों और मेहंदी डिजाइनों को दिखाती हैं, और ये पोस्ट बहुत लोकप्रिय होते हैं। रील और शॉर्ट वीडियो भी तीज के त्योहार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं।

 

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महिलाएं तीज के गीतों पर नृत्य करती हुई रील्स बनाती हैं, मेहंदी लगाने की प्रक्रिया का वीडियो साझा करती हैं, और पारंपरिक पकवानों की रेसिपी के वीडियो भी बनाती हैं। ये वीडियो न केवल मनोरंजन प्रदान करते हैं, बल्कि तीज की संस्कृति को भी बढ़ावा देते हैं और उसे युवाओं तक पहुंचाते हैं।

सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान

सोशल मीडिया ने तीज के उत्सव को और भी बड़ा बना दिया है। इसके कुछ महत्वपूर्ण फायदे हैं:

  • कनेक्टिविटी: सोशल मीडिया दूर रहने वाले परिवारों और दोस्तों को एक-दूसरे से जुड़ने में मदद करता है।
  • प्रचार: यह त्योहार की परंपराओं और रीति-रिवाजों को बढ़ावा देता है और उन्हें वैश्विक मंच पर लाता है।
  • सूचना का स्रोत: लोग सोशल मीडिया के माध्यम से तीज के इतिहास, महत्व और अनुष्ठानों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

 

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हालाँकि, इसके कुछ नुकसान भी हैं:

  • दबाव: सोशल मीडिया पर ‘सही’ तीज की तस्वीर दिखाने का दबाव बढ़ गया है, जिससे कुछ लोग अनावश्यक तनाव महसूस करते हैं।
  • व्यावसायीकरण: तीज जैसे त्योहारों का सोशल मीडिया पर बढ़ता व्यावसायीकरण हो रहा है, जहाँ व्यक्तिगत भावनाएं पीछे छूट जाती हैं।
  • प्रामाणिकता की कमी: वर्चुअल उत्सव पारंपरिक समारोहों की गर्मी और प्रामाणिकता की जगह नहीं ले सकते।

वर्चुअल दुनिया की तरफ विश्व

इसमें कोई संदेह नहीं है कि सोशल मीडिया ने तीज जैसे पारंपरिक त्योहारों को मनाने के तरीके में क्रांति ला दी है। यह एक ऐसा माध्यम बन गया है जो परंपरा और आधुनिकता का अद्भुत मिश्रण प्रस्तुत करता है।

ऑनलाइन पूजा और वर्चुअल उत्सवों ने त्योहारों को और अधिक सुलभ और समावेशी बना दिया है, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि त्योहारों का असली सार सामुदायिक एकता, परिवार के साथ बिताया गया समय, और साझा की गई खुशी में है।

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि डिजिटल माध्यम हमारे पारंपरिक मूल्यों और अनुष्ठानों को कमजोर न करें, बल्कि उन्हें मजबूत करें। सोशल मीडिया तीज के जश्न को बढ़ाने का एक उपकरण है, न कि इसका विकल्प।

पारंपरिक और डिजिटल दुनिया के इस अनूठे संगम में, तीज का त्योहार हमारे दिलों में अपनी विशेष जगह बनाए हुए है, चाहे हम उसे ऑनलाइन मनाएं या ऑफलाइन।


Images: Freepik

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