Myopia Causes In Children-आजकल बच्चों में आंखों की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं और उनमें से सबसे आम है मायोपिया (Myopia) या निकट दृष्टि दोष। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा पास की वस्तुएं तो साफ देख लेता है, लेकिन दूर की चीज़ें धुंधली दिखाई देती हैं।
डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता उपयोग, बाहर खेलने की कमी, गलत खानपान और आनुवांशिक कारण इसकी प्रमुख वजहें हैं। अगर समय रहते मायोपिया के शुरुआती लक्षण पहचान लिए जाएं और सही कदम उठाए जाएं, तो बच्चों की आंखों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
Myopia Causes In Children-मायोपिया क्या है?
Myopia एक दृष्टि समस्या है, जो तब होती है जब आंख का आकार सामान्य से लंबा हो जाता है या फिर कॉर्निया ज़्यादा मुड़ जाता है। इस कारण रोशनी का फोकस रेटिना पर पड़ने की बजाय उसके आगे पड़ता है और दूर की वस्तुएं धुंधली दिखने लगती हैं। Myopia का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जीवन पर पड़ता है, क्योंकि वे दूर से चीज़ों को साफ नहीं देख पाते।
बच्चों में मायोपिया के कारण
बच्चों में Myopia होने की कई वजहें हो सकती हैं। सबसे बड़ा कारण है डिजिटल डिवाइस का अधिक उपयोग। मोबाइल, टीवी और लैपटॉप पर लगातार ध्यान केंद्रित करने से आंखों पर दबाव पड़ता है।
इसके अलावा पढ़ाई करते समय किताब को बहुत पास से पढ़ना या अंधेरे में पढ़ाई करना भी आंखों की रोशनी पर असर डालता है। Myopia का एक और कारण आनुवांशिकता है। अगर माता-पिता को यह समस्या है, तो बच्चों में भी इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
आजकल बच्चे बाहर खेलने और धूप में समय बिताने के बजाय घर के अंदर ज़्यादा रहते हैं, जिससे आंखों को प्राकृतिक रोशनी नहीं मिल पाती। साथ ही, विटामिन और पोषक तत्वों की कमी भी मायोपिया को बढ़ावा देती है।
बच्चों में मायोपिया के शुरुआती लक्षण
Myopia को पहचानना आसान है, लेकिन अक्सर माता-पिता इसे नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर बच्चा दूर की वस्तुएं साफ नहीं देख पाता और टीवी या ब्लैकबोर्ड पास जाकर देखता है, तो यह मायोपिया का संकेत हो सकता है।
इसके अलावा बच्चे का बार-बार आंखें मलना, उनमें पानी आना, सिरदर्द होना और किताब को बहुत पास से पढ़ना भी इसके लक्षण हैं। कुछ बच्चों को तेज रोशनी में परेशानी होती है और उनकी आंखें जल्दी थक जाती हैं। यदि ये संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
मायोपिया से बचाव के उपाय
Myopia से बचाव के लिए सबसे जरूरी है बच्चों का स्क्रीन टाइम नियंत्रित करना। छोटे बच्चों को मोबाइल या टीवी से दूर रखना चाहिए और बड़े बच्चों के लिए भी रोज़ाना 1–2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम न होने दें।
बच्चों को रोज़ाना कम से कम 1–2 घंटे बाहर खेलने और धूप में समय बिताने की आदत डालनी चाहिए। पढ़ाई करते समय कमरे में पर्याप्त रोशनी होनी चाहिए और किताब आंखों से कम से कम 25–30 सेंटीमीटर की दूरी पर होनी चाहिए।
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार देना भी बहुत जरूरी है। गाजर, पालक, पपीता, संतरा, अखरोट और मछली जैसी चीजें आंखों के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं।
साल में कम से कम एक बार बच्चों की आंखों की जांच करानी चाहिए ताकि समस्या को शुरुआती अवस्था में ही पकड़कर रोका जा सके। बच्चों को हल्के-फुल्के आंखों के व्यायाम जैसे आंखें घुमाना और बार-बार पलकें झपकाना भी सिखाना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर बच्चा लगातार सिरदर्द की शिकायत करता है, टीवी और किताब पास से देखने की आदत डाल लेता है, बार-बार आंखें मलता है या रोशनी से परेशानी महसूस करता है, तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती अवस्था में इलाज करने से Myopia को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है।
Myopia बच्चों में बढ़ती हुई समस्या है, लेकिन सही जागरूकता और देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को स्क्रीन से दूर रखें, बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें और पौष्टिक भोजन दें। याद रखें, बच्चों की आंखें उनकी सबसे बड़ी पूंजी हैं, इसलिए उनकी देखभाल में लापरवाही कभी न करें।
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