How to Handle Temper Tantrums in Kids- बच्चों की परवरिश के दौरान माता-पिता अक्सर एक चुनौती का सामना करते हैं – टेम्पर टैंट्रम्स। यह स्थिति तब होती है जब बच्चा गुस्सा, नाराज़गी या निराशा को रोने, चिल्लाने, जमीन पर लोटने, चीज़ें फेंकने या जिद करने के रूप में व्यक्त करता है।
टेम्पर टैंट्रम्स आमतौर पर 1 से 4 साल की उम्र के बच्चों में ज्यादा देखे जाते हैं, लेकिन कभी-कभी बड़े बच्चों में भी हो सकते हैं। यह उनके भावनात्मक और मानसिक विकास का एक सामान्य हिस्सा है, लेकिन अगर इसे सही तरीके से मैनेज न किया जाए, तो यह आदत बन सकती है।
How to Handle Temper Tantrums in Kids- बच्चों में बढ़ने वाले टेम्पर टैंट्रम्स को कैसे कर सकते हैं कम, जानें उपाय
टेम्पर टैंट्रम्स क्या हैं?
टेम्पर टैंट्रम्स का मतलब है — बच्चे का अपनी इच्छा पूरी न होने पर या किसी स्थिति से असहज होने पर अचानक गुस्से और भावनात्मक प्रतिक्रिया देना। इसमें बच्चा इन एक्टिविटी को करता है:
- जोर-जोर से रोना या चिल्लाना
- पैरों से ज़मीन पटकना या चीज़ें मारना
- बात करने से इनकार करना
- खुद को या दूसरों को मारना
- जमीन पर लेटकर रोना
- कभी कभी सांसे तक रोक लेना।
यह बच्चों के लिए अपनी भावनाओं और इच्छाओं को व्यक्त करने का एक तरीका है, क्योंकि वे अभी छोटे होते हैं और शब्दों की सही जानकारी ना होने के कारण अपने भाव इन तरीकों से बताते हैं।
टेम्पर टैंट्रम्स क्यों होते हैं?
- कम्युनिकेशन स्किल्स का अभाव: छोटे बच्चों के पास अपनी ज़रूरत या भावनाएं बताने के लिए सीमित शब्दावली होती है, जिससे वे निराश होकर रोने या गुस्सा करने लगते हैं।
- स्वतंत्रता की इच्छा: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे खुद फैसले लेना चाहते हैं। जब उनकी मर्जी न चले, तो वे नाराज़ हो जाते हैं।
- थकान और भूख: नींद की कमी या भूख लगने पर बच्चे चिड़चिड़े हो जाते हैं और छोटी बात पर भी गुस्सा करने लगते हैं।
- ध्यान आकर्षित करना: कुछ बच्चे टैंट्रम का इस्तेमाल माता-पिता का ध्यान खींचने के लिए करते हैं।
- सीमाएं चेक करना: बच्चे यह भी देखना चाहते हैं कि माता-पिता उनकी जिद कब तक मानते हैं और कब नहीं मानते, यानी वे लिमिट टेस्ट करते हैं।
कैसे करें मैनेज ?
1-गुस्से के कारण को समझें
बच्चों के गुस्से के पीछे कई कारण हो सकते हैं:
- भूख या थकान – जब बच्चा भूखा या नींद से वंचित होता है, तो चिड़चिड़ा हो जाता है।
- नियंत्रण की इच्छा – बच्चे चाहते हैं कि उनकी बात मानी जाए और वे खुद फैसले लें।
- कम्युनिकेशन की कमी – वे अपनी भावनाएं शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाते, जिससे निराशा होती है।
- ध्यान आकर्षित करना – कभी-कभी गुस्सा सिर्फ मम्मी-पापा का ध्यान पाने का तरीका होता है।
पहले कारण पहचानें, फिर समाधान पर जाएं।
2-खुद शांत रहें
बच्चे का गुस्सा आपके गुस्से से कभी शांत नहीं होगा। अगर आप चिल्लाते हैं, तो बच्चा और अधिक रिएक्ट करेगा।
- गहरी सांस लें और धीरे बोलें।
- अपने चेहरे और आवाज में नरमी बनाए रखें।
3-बच्चे की भावनाओं को मान्यता दें
- गुस्सा आने पर बच्चा चाहता है कि कोई उसकी बात सुने।
- कहें: “मुझे पता है तुम नाराज़ हो, चलो बात करते हैं।“
- उसकी भावनाओं को नकारें नहीं, बल्कि समझने की कोशिश करें।
4-सीमाएं तय करें
- प्यार के साथ-साथ अनुशासन भी जरूरी है।
- स्पष्ट नियम बनाएं कि मारना, चीजें तोड़ना या चिल्लाना स्वीकार्य नहीं है।
- नियम तोड़ने पर तयशुदा परिणाम दें, जैसे खिलौने कुछ समय के लिए हटाना।
5-टाइम-आउट का उपयोग करें
- अगर बच्चा बहुत गुस्से में है और खुद को नियंत्रित नहीं कर पा रहा है, तो उसे 2–5 मिनट के लिए एक शांत जगह बैठाएं।
- टाइम-आउट सजा नहीं, बल्कि शांत होने का समय है।
6-ध्यान भटकाना (Distraction Technique)
- छोटे बच्चों में यह तरीका असरदार होता है।
- किसी खेल, कहानी, ड्रॉइंग या गाने में उसका ध्यान लगाएं।
- गुस्से के माहौल से उसे बाहर ले जाएं।
7-गुस्सा कम करने की तकनीक सिखाएं
- बच्चों को भावनाएं मैनेज करना सिखाना जरूरी है।
- गहरी सांस लेने की प्रैक्टिस कराएं।
- कहें कि जब गुस्सा आए तो 10 तक गिनें।
- ड्रॉइंग, जर्नल लिखना या म्यूजिक सुनना अच्छे विकल्प हैं।
8-पॉजिटिव रिइनफोर्समेंट दें
- जब बच्चा बिना गुस्सा किए अपनी बात कहे या शांत रहे, तो उसकी तारीफ करें।
- कहें: “मुझे अच्छा लगा कि तुमने शांत रहकर बात की।“
- छोटे-छोटे इनाम दें, जैसे स्टिकर, पसंदीदा कहानी, या खेल का समय।
9-रूटीन और लाइफस्टाइल पर ध्यान दें
- बच्चे को पर्याप्त नींद, पौष्टिक भोजन और खेलने का समय दें।
- स्क्रीन टाइम सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा स्क्रीन से चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है।
10-रोल मॉडल बनें
- बच्चे बड़ों को देखकर सीखते हैं।
- खुद भी गुस्से में शांत रहना सीखें।
- बहस के बजाय बातचीत से समस्याएं सुलझाएं।
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डॉक्टर या विशेषज्ञ से कब लें सलाह?
अगर Temper Tantrums बहुत ज्यादा, लंबे समय तक या हिंसक रूप में हो रहे हैं, जैसे –
- बच्चा खुद को या दूसरों को चोट पहुंचा रहा है
- बार-बार दिन में कई बार टैंट्रम हो रहे हैं
- 5–6 साल की उम्र के बाद भी स्थिति में सुधार नहीं है तो बाल मनोवैज्ञानिक या काउंसलर से सलाह लेना सही रहेगा।
गुस्सैल बच्चे को संभालना धैर्य और निरंतरता मांगता है। बच्चे के गुस्से के पीछे के कारण को समझना, उसे भावनाएं व्यक्त करने के बेहतर तरीके सिखाना और प्यार के साथ अनुशासन बनाए रखना – यही प्रैक्टिकल पेरेंटिंग की कुंजी है।
Temper Tantrums बच्चों के विकास का सामान्य हिस्सा हैं, लेकिन इन्हें सही तरीके से संभालना जरूरी है। धैर्य, समझदारी और प्यार से बच्चे को अपनी भावनाओं को सही तरीके से व्यक्त करना सिखाया जा सकता है।
याद रखें — बच्चे के टैंट्रम के समय आपका शांत रहना और सही प्रतिक्रिया देना ही इस समस्या को लंबे समय तक टालने का सबसे असरदार तरीका है। आपका शांत रहना और सकारात्मक दृष्टिकोण बच्चे के गुस्से को कम करने का सबसे असरदार तरीका है।
इमेज सोर्स: Freepik
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ब्लॉगिंग को पैशन की तरह फॉलो करने वाले आशीष की टेक्नोलॉजी, बिज़नेस, लाइफस्टाइल, ट्रैवेल और ट्रेंडिंग पोस्ट लिखने में काफी दिलचस्पी है।