Ganesh Chaturthi Special Dishes-गणेश चतुर्थी का पर्व केवल पूजा-पाठ और उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी परंपराओं और स्वादिष्ट व्यंजनों से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि गणपति बप्पा को मिठाई और खासतौर पर मोदक बेहद प्रिय हैं।
इसीलिए भक्तजन हर साल बप्पा के स्वागत के लिए तरह-तरह के व्यंजन बनाते हैं और उन्हें भोग अर्पित करते हैं। इन व्यंजनों का धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि इन्हें प्रसाद के रूप में ग्रहण करना शुभ माना जाता है।
आइए जानते हैं कि आखिर गणपति बप्पा को कौन-कौन से व्यंजन सबसे अधिक प्रिय हैं और उनका महत्व क्या है।
Ganesh Chaturthi Special Dishes-जानिए गणपति बप्पा के प्रिय व्यंजन के बारे में!
मोदक: गणपति का सबसे प्रिय भोग
Ganesh Chaturthi की पहचान मोदक से है। महाराष्ट्र में खासकर उकडीचे मोदक बनाए जाते हैं। यह चावल के आटे से बने और गुड़ व नारियल की भराई से तैयार किए गए पकवान होते हैं जिन्हें भाप में पकाया जाता है।
इसके अलावा तले हुए मोदक, चॉकलेट मोदक और ड्राई फ्रूट मोदक भी अब काफी लोकप्रिय हैं। पूजा के दौरान सबसे पहले मोदक गणपति बप्पा को अर्पित किया जाता है और बाद में प्रसाद स्वरूप भक्तों में बांटा जाता है।
Forgot to post my Ganesh Chaturthi Pooja Thali – some of you were asking for it. Featuring spicy rasedar hing and ginger aloo, mini jaggery Modak, moong dal, crisp wheat & suji pooris, khoya and suji laddoos, sprouted moong masala & sweet Malpuas with saunf.
Our Ganeshji is a… pic.twitter.com/TtkwSVmVZo
— Savitri Mumukshu – सावित्री मुमुक्षु (@MumukshuSavitri) September 9, 2024
पूरण पोली और करंजी का महत्व
महाराष्ट्र और पश्चिम भारत के कई हिस्सों में Ganesh Chaturthi पर पूरण पोली बनाना परंपरा है। यह मीठी रोटी चने की दाल, गुड़ और घी से तैयार की जाती है।
इसके अलावा करंजी (या गुजिया) भी इस अवसर पर बनाई जाती है। इसमें नारियल, सूजी और ड्राई फ्रूट की भराई होती है और इसे घी में तलकर कुरकुरा बनाया जाता है।
लड्डू और नारियल बर्फी
भगवान गणेश को लड्डू बेहद प्रिय हैं। पूजा में बेसन के लड्डू या मोटिचूर के लड्डू प्रसाद के रूप में अर्पित किए जाते हैं। वहीं नारियल बर्फी का भी खास महत्व है क्योंकि नारियल को शुभ फल माना जाता है। दूध, चीनी और नारियल से बनी यह मिठाई त्यौहार के स्वाद को और बढ़ा देती है।
दक्षिण भारत के पारंपरिक प्रसाद
Ganesh Chaturthi का उत्सव केवल महाराष्ट्र तक सीमित नहीं है। दक्षिण भारत में यह पर्व अलग व्यंजनों के साथ मनाया जाता है। यहां पायसम (दूध और चावल से बनी खीर), वड़ा, इडली और केले के पत्ते पर सजी थाली का प्रसाद भगवान को अर्पित किया जाता है। इस विविधता से पता चलता है कि गणपति उत्सव पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर को जोड़ता है।
स्वास्थ्य और पर्यावरण का ख्याल
इस बार भक्तों में इको-फ्रेंडली मूर्तियों और हेल्दी प्रसाद को लेकर खास उत्साह है। बहुत से लोग गुड़ और ड्राई फ्रूट से बने हेल्दी मोदक और मिठाइयों को प्राथमिकता दे रहे हैं ताकि परंपरा निभाने के साथ-साथ स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा सके।
वहीं विसर्जन के समय मिट्टी की मूर्तियों और पर्यावरण सुरक्षित तरीकों का उपयोग बढ़ रहा है। Ganesh Chaturthi का पर्व आस्था, भक्ति और स्वाद का संगम है। भगवान गणेश की पूजा केवल मंत्रों और आरती से ही नहीं बल्कि उनके प्रिय व्यंजनों से भी पूरी होती है।
मोदक, पूरण पोली, लड्डू और पायसम जैसे पकवान इस पर्व को और खास बनाते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस उत्सव का समापन 6 सितंबर 2025, शनिवार को अनंत चतुर्दशी पर गणपति विसर्जन के साथ होगा।
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