Hartalika Teej 2025 Significance- भारत एक ऐसा देश है जहां हर दिन कोई न कोई त्योहार मनाया जाता है। ये त्योहार न सिर्फ उत्सव और खुशी का माहौल लाते हैं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपराओं को भी दर्शाते हैं।
इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण त्योहार है तीज, जो विवाहित महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। तीज के दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं। यह सिर्फ एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व भी छिपा हुआ है।
Hartalika Teej 2025 Significance- जानें तीज पर सोलह श्रृंगार करने के पीछे का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सोलह श्रृंगार: क्या है इसका महत्व ?
सोलह श्रृंगार शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है: सोलह और श्रृंगार। सोलह का अर्थ है 16, और श्रृंगार का अर्थ है सजावट। प्राचीन काल से ही इन सोलह श्रृंगारों का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रहा है।
यह माना जाता है कि सोलह श्रृंगार देवी लक्ष्मी को आकर्षित करते हैं और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि लाते हैं। सोलह श्रृंगार को देवी-देवताओं को प्रसन्न करने और अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया जाता है।
कौन कौन से हैं ये 16 श्रृंगार
- मेहंदी: इसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है। मेहंदी का रंग जितना गहरा होता है, पति-पत्नी के बीच प्यार उतना ही गहरा होता है।
- मांग टीका: यह माथे के बीच में पहना जाता है और देवी पार्वती का प्रतीक माना जाता है। यह महिला के सम्मान और सौभाग्य का प्रतीक है।
- बिंदी: यह भौंहों के बीच लगाई जाती है। इसे ऊर्जा का केंद्र माना जाता है और यह एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है।
- सिंदूर: यह मांग में भरा जाता है और इसे शादीशुदा होने का सबसे महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। यह पति की लंबी उम्र की कामना का प्रतीक है।
- काजल: काजल आंखों की सुंदरता को बढ़ाता है और बुरी नजर से भी बचाता है।
- नथनी: यह नाक में पहनी जाती है और इसे सुहाग और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है।
- कर्णफूल (ईयररिंग्स): ये कानों में पहने जाते हैं और यह माना जाता है कि इन्हें पहनने से महिलाओं की सुनने की क्षमता और सौभाग्य बढ़ता है।
- हार या मंगलसूत्र: यह गले में पहना जाता है और इसे पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते का प्रतीक माना जाता है।
- बाजूबंद: यह बांहों में पहना जाता है और माना जाता है कि यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर रखता है।
- चूड़ियां: ये कलाई में पहनी जाती हैं और इन्हें सुहाग का प्रतीक माना जाता है। इनकी खनक घर में सकारात्मक ऊर्जा लाती है।
- अंगूठी: यह उंगलियों में पहनी जाती है और पति-पत्नी के बीच प्यार और विश्वास का प्रतीक है।
- कमरबंद: यह कमर में पहना जाता है और शरीर की सुंदरता को बढ़ाता है।
- पायल: यह पैरों में पहनी जाती है और इसकी आवाज घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
- बिछिया: ये पैरों की उंगलियों में पहनी जाती हैं और शादीशुदा होने का प्रतीक हैं।
- ओढ़नी: सिर पर ओढ़ी जाती है और महिला के सम्मान का प्रतीक है।
- परफ्यूम या इत्र: यह सुगंध के लिए लगाया जाता है और माना जाता है कि यह वातावरण को शुद्ध करता है।
तीज पर सोलह श्रृंगार का महत्व
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Hartalika Teej का त्योहार भगवान शिव और देवी पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 108 जन्मों तक तपस्या की थी। इस तपस्या के बाद, भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
तभी से तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं द्वारा मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं देवी पार्वती की तरह ही तैयार होती हैं और उनसे अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करती हैं।
सोलह श्रृंगार करके वे देवी पार्वती के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करती हैं। यह परंपरा न केवल उनके वैवाहिक जीवन को मजबूत करती है, बल्कि उन्हें एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना को भी याद दिलाती है।
वैज्ञानिक महत्व
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सोलह श्रृंगार का वैज्ञानिक महत्व भी है। सनातन धर्म के अनुसार 16 श्रृंगार करने से महिलाओं को कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इसकी पुष्टि वैज्ञानिकों ने भी की है। आइये जानते हैं कि किस श्रृंगार से क्या लाभ होते हैं ?
- मांग टीका और बिंदी: ये दोनों माथे पर एक विशेष बिंदु पर लगाए जाते हैं, जिसे ‘आज्ञा चक्र’ कहा जाता है। इसे लगाने से सिरदर्द और तनाव से राहत मिलती है।
- सिंदूर: सिंदूर में हल्दी, चूना और पारा होता है। पारा शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है और तनाव को कम करता है।
- चूड़ियां और पायल: इन दोनों की ध्वनि एक्यूप्रेशर के सिद्धांतों पर काम करती है। यह रक्त संचार को बेहतर बनाती है और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाती है।
- मेहंदी: यह एक जड़ी-बूटी है जो शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है और तनाव को कम करती है।
सोलह श्रृंगार का सांस्कृतिक महत्व
सोलह श्रृंगार न सिर्फ एक परंपरा है, बल्कि यह हमारी समृद्ध संस्कृति और सभ्यता का भी हिस्सा है। यह हमें हमारे इतिहास और परंपराओं से जोड़ता है। यह सौंदर्य और नारीत्व का प्रतीक भी है। सोलह श्रृंगार करके महिलाएं खुद को सुंदर महसूस करती हैं और उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।
यह एक ऐसा रिवाज है जो पीढ़ियों से चला आ रहा है और भविष्य में भी जारी रहेगा। Hartalika Teej पर महिलाओं का सोलह श्रृंगार करना केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा धार्मिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक महत्व भी छिपा हुआ है।
यह परंपरा वैवाहिक जीवन में प्रेम, सम्मान और सुख-समृद्धि लाती है। यह हमें हमारी जड़ों और परंपराओं से जोड़ती है और हमें हमारे इतिहास को याद दिलाती है।
इसलिए, Hartalika Teej का त्योहार मनाते समय महिलाएं सोलह श्रृंगार करके न सिर्फ खुद को सजाती हैं, बल्कि अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए भी प्रार्थना करती हैं। यह एक ऐसा पर्व है जो प्यार, विश्वास और सम्मान के बंधन को मजबूत करता है।
इमेज क्रेडिट: Freepik
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ब्लॉगिंग को पैशन की तरह फॉलो करने वाले आशीष की टेक्नोलॉजी, बिज़नेस, लाइफस्टाइल, ट्रैवेल और ट्रेंडिंग पोस्ट लिखने में काफी दिलचस्पी है।